
देहरादून। उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा विभाग में लगभग दो दशक से लंबित एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 1992 से 1996 के बीच नियुक्त सहायक अध्यापक (एलटी) की अनंतिम वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने के निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद हजारों शिक्षकों की वरिष्ठता में बदलाव होने की संभावना है, जबकि लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित कई शिक्षकों को उनका लंबे समय से लंबित वरिष्ठता अधिकार मिल सकेगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि लोक सेवा प्राधिकरण द्वारा रूपचंद लखेड़ा एवं अन्य याचिकाओं में दिए गए निर्णयों के अनुपालन में तैयार की गई अनंतिम वरिष्ठता सूची को अब अंतिम रूप दिया जाना है। इसके लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशकों को आवश्यक कार्रवाई कर अंतिम वरिष्ठता सूची तैयार कर निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इस मामले से संबंधित प्रेमलता बौड़ाई सहित अन्य याचिकाओं का भी निस्तारण हो चुका है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने में कोई कानूनी बाधा नहीं बची है। विभाग का मानना है कि इससे लंबे समय से लंबित विवाद का समाधान संभव हो सकेगा।
हजारों शिक्षकों की वरिष्ठता में होगा बदलाव
वरिष्ठता सूची में संशोधन का प्रभाव बड़ी संख्या में शिक्षकों पर पड़ेगा। विभागीय आकलन के अनुसार करीब चार हजार शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। वहीं, लोक सेवा आयोग से चयनित कई शिक्षकों को वरिष्ठता सूची में अपेक्षित स्थान मिलने की संभावना है। इससे भविष्य में पदोन्नति, स्थानांतरण और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला सीटी (सर्टिफिकेट ऑफ टीचिंग) शिक्षकों और लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती से नियुक्त एलटी शिक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रूपचंद लखेड़ा के अनुसार वर्ष 2005 में विभाग ने कुछ सीटी शिक्षकों को निर्धारित दस वर्ष के बजाय पांच वर्ष की सेवा पूरी होने पर एलटी संवर्ग में संविलियन कर दिया और उन्हें वरिष्ठता का लाभ भी दे दिया। इसके कारण आयोग से चयनित शिक्षकों का वरिष्ठता क्रम काफी पीछे चला गया।
इसी निर्णय को चुनौती देते हुए मामला न्यायालय और लोक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचा। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब आयोग से चयनित शिक्षकों के पक्ष में निर्णय आने के बाद वरिष्ठता सूची संशोधित की जा रही है।
पदोन्नति प्रक्रिया पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम वरिष्ठता सूची लागू होने के बाद विभाग में भविष्य की पदोन्नतियों, चयन वेतनमान, प्रशासनिक दायित्वों और अन्य सेवा लाभों की प्रक्रिया भी इसी सूची के आधार पर आगे बढ़ेगी। ऐसे में शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों के सेवा अभिलेखों और वरिष्ठता क्रम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
शिक्षा विभाग अब मंडलीय स्तर पर अंतिम सूची तैयार कराकर उसे निदेशालय में अनुमोदन के लिए भेजेगा। सूची जारी होने के बाद संबंधित शिक्षकों को संशोधित वरिष्ठता के अनुसार सेवा लाभ प्रदान किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।




