
देहरादून। उत्तराखंड में बाघ संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की स्थायी और संतुलित आबादी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को नया बल मिला है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से पांच और बाघों को राजाजी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल हैं। इस मंजूरी के बाद पार्क प्रशासन ने आगामी प्रक्रिया की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में लंबे समय से बाघों की स्थायी उपस्थिति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता होने के बावजूद मानव निर्मित अवरोधों के कारण बाघों का आवागमन बाधित रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2016 में बाघ शिफ्टिंग योजना तैयार की गई थी, जिसे वर्ष 2018 में एनटीसीए की स्वीकृति प्राप्त हुई। इसके तहत दिसंबर 2020 में पहला बाघ कॉर्बेट से राजाजी लाया गया था।
वर्ष 2020 से 2025 के बीच कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से कुल पांच बाघों का स्थानांतरण किया गया, जिनमें तीन बाघिन और दो नर बाघ शामिल थे। इन सभी बाघों को मेडिकल परीक्षण के बाद सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था ताकि उनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और मूवमेंट पर लगातार निगरानी रखी जा सके। मई 2025 में पांचवें बाघ को मोतीचूर रेंज में छोड़े जाने के साथ इस परियोजना का पहला चरण पूरा हो गया था।
अब परियोजना के दूसरे चरण के तहत फिर से पांच बाघ राजाजी लाए जाएंगे। वन अधिकारियों का मानना है कि नई खेप आने से पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ेगी और प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया को गति मिलेगी। इससे क्षेत्र में जैव विविधता मजबूत होगी और राजाजी टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ आवासों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
हालांकि इस अभियान को पहले कुछ झटके भी लगे हैं। वर्ष 2024 में एक बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया था, जिससे पार्क प्रशासन की उम्मीदें बढ़ी थीं। लेकिन बाद में दो शावकों का शिकार गुलदार द्वारा किए जाने की पुष्टि हुई, जबकि दो अन्य शावकों का कोई पता नहीं चल सका। इसके अलावा, वर्ष 2020 से 2025 के बीच लाए गए पांच बाघों में से तीन के पार्क क्षेत्र से बाहर चले जाने की आशंका भी जताई गई है। इनमें से एक बाघ समय-समय पर पार्क की सीमा में वापस दिखाई देता है।
राजाजी टाइगर रिजर्व में वर्तमान में लगभग 55 बाघ मौजूद हैं, लेकिन इनमें अधिकांश पूर्वी क्षेत्र में निवास करते हैं, जो कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है। पश्चिमी क्षेत्र लंबे समय से बाघों की कमी से जूझ रहा है। गंगा नदी, चीला नहर, राजमार्ग और अन्य मानव निर्मित संरचनाओं के कारण दोनों क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी क्षेत्र में पर्याप्त शिकार आधार और अनुकूल आवास उपलब्ध हैं, जिससे यहां अधिक संख्या में बाघों को बसाया जा सकता है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोशे के अनुसार, एनटीसीए के समक्ष पांच और बाघों को स्थानांतरित करने का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया था। प्राधिकरण ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है और जल्द ही इसकी औपचारिक लिखित मंजूरी प्राप्त होने की उम्मीद है। इसके बाद बाघों के चयन, स्वास्थ्य परीक्षण, ट्रांसलोकेशन और निगरानी से संबंधित प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, बल्कि राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है और उत्तराखंड की वन्यजीव संरक्षण नीति को नई सफलता मिल सकती है।




