
देहरादून। उत्तराखंड में वार्षिक स्थानांतरण सत्र अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन अधिकांश विभागों में तबादला प्रक्रिया की धीमी गति प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए लागू वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के अनुसार प्रत्येक वर्ष 10 जून तक सभी विभागों में स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जानी होती है, किंतु निर्धारित समयसीमा समाप्त होने में केवल कुछ दिन शेष रहने के बावजूद अधिकांश विभाग अभी तक तबादला सूची तैयार करने में भी सफल नहीं हो पाए हैं।
प्रदेश में अब तक केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारियों के तबादले ही प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त कुछेक विभागों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश विभागों में स्थानांतरण प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। इससे कर्मचारियों और अधिकारी वर्ग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सामान्यतः तबादला सत्र की तैयारियां कई माह पहले से शुरू कर दी जाती हैं। विभागों द्वारा पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार की जाती है, सेवा अवधि का परीक्षण किया जाता है और स्थानांतरण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया जाता है। इस वर्ष हालांकि स्थिति भिन्न दिखाई दे रही है। कई विभागों में अभी तक अंतिम सूची तैयार नहीं हो पाई है, जिससे समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होने को लेकर संशय बढ़ गया है।
स्थानांतरण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसे अधिकारी और कर्मचारी जो किसी एक स्थान पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं, उन्हें स्थानांतरित किया जाना आवश्यक माना गया है। इसी आधार पर इस बार व्यापक स्तर पर तबादलों की संभावना व्यक्त की जा रही थी। माना जा रहा था कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को संतुलित करने तथा चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर तबादले करेगी। लेकिन अब तक की स्थिति को देखते हुए ऐसी संभावनाएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं।
केवल स्थानांतरण ही नहीं, बल्कि विभागीय पदोन्नति प्रक्रियाओं में भी सुस्ती देखने को मिल रही है। नियमानुसार विभागों को समय पर वरिष्ठता सूची जारी कर कर्मचारियों से आपत्तियां आमंत्रित करनी चाहिए और उसके बाद पदोन्नति सूची जारी करनी चाहिए। लेकिन कई विभागों में अभी तक वरिष्ठता सूची तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। इससे पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में भी निराशा बढ़ रही है।
कर्मचारी संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि समयबद्ध पदोन्नति और स्थानांतरण कर्मचारियों के कैरियर विकास तथा प्रशासनिक दक्षता दोनों के लिए आवश्यक हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और कर्मचारियों की अपेक्षाएं भी अधूरी रह जाती हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडेय ने कहा कि इस विषय को पहले भी मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन के समक्ष प्रमुखता से उठाया गया था। बैठक में समयबद्ध पदोन्नति और स्थानांतरण सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई थी, लेकिन उसके बावजूद विभागों की कार्यशैली में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यदि 10 जून तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कर्मचारी संगठन पुनः मुख्य सचिव के समक्ष यह मुद्दा उठाएंगे और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की मांग करेंगे।
प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो इस वर्ष का तबादला सत्र लगभग निष्प्रभावी साबित हो सकता है। ऐसे में न केवल कर्मचारियों की अपेक्षाएं प्रभावित होंगी, बल्कि आगामी चुनावी वर्ष से पहले प्रशासनिक पुनर्संतुलन की सरकार की योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें आगामी कुछ दिनों पर टिकी हैं कि विभाग समयसीमा के भीतर आवश्यक कार्रवाई कर पाते हैं या नहीं।




