
देहरादून। राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में कॉकरोच का बढ़ता प्रकोप अब लोगों के लिए नई चिंता बनता जा रहा है। अब तक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच की समस्या आम थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों से ब्रिटिश और आयरिश मूल का ब्राउन बैंडेड कॉकरोच भी तेजी से फैलने लगा है। आकार में छोटा और भूरी धारियों वाला यह कॉकरोच अब घरों के बेडरूम, सोफे, फर्नीचर और फ्रिज जैसी जगहों में अपनी कॉलोनियां बना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि देहरादून का लगभग 10 महीने तक रहने वाला मध्यम और गर्म मौसम इन कॉकरोचों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। यही वजह है कि इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों को अब इनके नियंत्रण के लिए नई रणनीतियां अपनानी पड़ रही हैं और अलग प्रकार के पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एग्रीटेक पेस्ट मैनेजमेंट सर्विस के संचालक एवं विशेषज्ञ सूरज कुमार के अनुसार, देहरादून में अब तक मुख्य रूप से अमेरिकन और जर्मन कॉकरोच ही पाए जाते थे। अमेरिकन कॉकरोच अधिकतर सीवर और गंदी जगहों में रहता है, जबकि जर्मन कॉकरोच रसोईघरों में तेजी से फैलता है। लेकिन ब्राउन बैंडेड कॉकरोच इन दोनों से अलग व्यवहार करता है। यह गर्म और सूखी जगहों जैसे बेडरूम, बेड, सोफा, अलमारी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आसपास रहना पसंद करता है।
उन्होंने बताया कि यह कॉकरोच आमतौर पर ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे देशों में अधिक पाया जाता है। संभावना जताई जा रही है कि यह वर्षों पहले विदेशों से किसी सामान या यात्री के जरिए यहां पहुंचा हो और अब धीरे-धीरे स्थानीय वातावरण में फैल गया हो। चूंकि यह घरों के अंदर संवेदनशील स्थानों में पाया जाता है, इसलिए इसके नियंत्रण में ऐसे पेस्टीसाइड का प्रयोग किया जाता है जिनकी दुर्गंध कम हो और जिनका मानव स्वास्थ्य पर कम असर पड़े।
देहरादून में पेस्ट कंट्रोल का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है। शहर में 32 लाइसेंस प्राप्त पेस्ट कंट्रोल एजेंसियां काम कर रही हैं, जबकि 400 से अधिक एजेंसियां बिना लाइसेंस के संचालित होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर में हर साल विभिन्न प्रकार के कीटों को खत्म करने पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिनमें लगभग 20 प्रतिशत राशि केवल कॉकरोच नियंत्रण पर खर्च की जाती है। यह आंकड़ा करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इसमें सबसे अधिक खर्च होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है।
इंडियन पेस्ट कंट्रोल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सतीश त्यागी के अनुसार पूरे देश में पेस्ट कंट्रोल उद्योग का बाजार लगभग छह हजार करोड़ रुपये का है। इनमें कॉकरोच नियंत्रण पर ही ढाई से तीन हजार करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। इसमें पेस्ट कंट्रोल एजेंसियों के साथ-साथ बाजार में बिकने वाले पेस्टीसाइड उत्पाद भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों ने लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, खाने-पीने की वस्तुओं को खुले में न छोड़ने और घरों में नियमित पेस्ट कंट्रोल कराने की सलाह दी है, ताकि इस तेजी से फैल रहे नए कॉकरोच प्रकोप से बचाव किया जा सके।



