
देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सोमवार को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए यह गौरव का क्षण माना जा रहा है।
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष, शिक्षा, सामाजिक सेवा और राजनीति के क्षेत्र में समर्पण का उदाहरण रहा है। 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के पलानधुरा गांव में जन्मे कोश्यारी ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से वर्ष 1964 में अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा और संस्कारों के प्रसार के उद्देश्य से उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत अध्यापन कार्य से की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कासगंज स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया, जहां भारतीय संस्कृति और मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। वर्ष 1966 में उन्होंने सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। उस दौर में दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की सुविधाएं बेहद सीमित थीं, ऐसे में यह पहल स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई।
राजनीतिक जीवन में भी भगत सिंह कोश्यारी ने लंबा सफर तय किया। वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य नामित किया गया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में वह नवगठित राज्य की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। बाद में उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
कोश्यारी वर्ष 2008 में राज्यसभा सदस्य चुने गए और वर्ष 2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए। उनकी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2019 में आया, जब उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।
राजनीति के साथ-साथ सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों में उनके योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मभूषण सम्मान के लिए चयनित किया है। उत्तराखंड में भाजपा नेताओं, सामाजिक संगठनों और उनके समर्थकों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई है।
राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने वाले भगत सिंह कोश्यारी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।




