
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में टिकट और पद दिलाने के नाम पर हुई ठगी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विधानसभा चुनावों की तैयारियों और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच एक ठग ने खुद को बड़े नेताओं से जुड़ा बताकर कई नेताओं को अपने जाल में फंसा लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि कई नेताओं के लिए यह बड़ी परेशानी का कारण भी बन गया है।
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद जहां सत्तारूढ़ दल में जश्न का माहौल था, वहीं कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई। इसी दौरान यह जानकारी सामने आई कि एक व्यक्ति नेताओं को पार्टी में ऊंचा पद दिलाने और आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूल कर फरार हो गया। बताया जा रहा है कि इस ठग ने राजनीतिक माहौल और नेताओं की सक्रियता का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से ठगी को अंजाम दिया।
मामले में खुद को सक्रिय कांग्रेसी बताने वाली भावना पांडे सामने आईं और उन्होंने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे करीब 25 लाख रुपये की ठगी की गई है। हालांकि, इस मामले में कई अन्य नेता भी ठगी का शिकार हुए हैं, लेकिन वे अभी तक खुलकर सामने नहीं आए हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ नेताओं से एक से दो करोड़ रुपये तक की रकम भी वसूली गई है।
बताया जा रहा है कि ठग ने खुद को राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं से करीबी संबंध रखने वाला बताया। इतना ही नहीं, विरोध करने या सवाल उठाने पर वह नेताओं को ऊपरी स्तर पर नाराजगी का डर दिखाकर चुप करा देता था। इसी दबाव और लालच के चलते कई नेता उसके झांसे में आ गए और भारी रकम गंवा बैठे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में टिकट पाने की होड़ और अंदरूनी प्रतिस्पर्धा ने इस तरह की ठगी के लिए जमीन तैयार की। कई नेता सक्रियता दिखाने और टिकट की दौड़ में आगे रहने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं, जिसका फायदा ऐसे ठग उठाते हैं।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपी तक पहुंचने के लिए कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि, जिन नेताओं ने अभी तक शिकायत नहीं की है, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि वे सामने आते हैं तो उन्हें रकम के स्रोत और लेन-देन का हिसाब भी देना पड़ सकता है।
इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि राजनीति में टिकट और पद के नाम पर होने वाले अंदरूनी खेल का फायदा उठाकर ठग किस तरह सक्रिय हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस जांच में कितनी तेजी आती है और क्या सभी पीड़ित सामने आकर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं या फिर यह मामला कुछ नामों तक ही सीमित रह जाता है।




