
देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती बिजली मांग और पीक आवर के दौरान होने वाली कमी से निपटने के लिए यूजेवीएनएल ने बड़ा कदम उठाया है। अब पहली बार राज्य में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के जरिए बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय सप्लाई किया जाएगा।
ऊर्जा विभाग की इस नई योजना के तहत यूजेवीएनएल कुल 120 मेगावाट क्षमता के बीईएसएस सिस्टम चार प्रमुख पावर हाउसों में स्थापित करेगा। इसमें चीला पावर हाउस में 75 मेगावाट, ढकरानी में 15 मेगावाट, तिलोथ में 15 मेगावाट और खटीमा में 15 मेगावाट क्षमता के सिस्टम लगाए जाएंगे। इन सभी परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अब तक स्थिति यह रही है कि यूजेवीएनएल जितनी बिजली उत्पादन करता है, वह तत्काल ग्रिड में भेज दी जाती है। दिन के समय बिजली की मांग अपेक्षाकृत कम रहती है, जबकि शाम के समय (पीक आवर) में मांग अचानक बढ़ जाती है। इस अंतर को पूरा करने के लिए यूपीसीएल को बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है।
नई प्रणाली लागू होने के बाद दिन में अतिरिक्त उत्पादित बिजली को बैटरियों में स्टोर किया जाएगा और शाम के समय जब मांग अधिक होगी, तब उसी स्टोर की गई बिजली को ग्रिड में आपूर्ति कर दिया जाएगा। इससे न केवल बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि आर्थिक रूप से भी फायदा होगा।
भविष्य में यूपीसीएल भी अपने बिजलीघरों में इस तरह के सिस्टम लगाने की तैयारी कर रहा है, ताकि अतिरिक्त बिजली को संरक्षित कर जरूरत के समय उपयोग में लाया जा सके।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य में ऊर्जा प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे पीक आवर में बिजली कटौती की समस्या कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति मिल सकेगी।




