
उत्तराखंड में शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहले ही छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की व्यापक तैयारी की है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें दी जाएंगी, लेकिन इस बार विशेष बात यह है कि वितरण कार्य सत्र प्रारंभ होने से पहले पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि 28 मार्च तक सभी जिलों के स्कूलों में किताबें पहुंचा दी जाएं, ताकि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के शुरू हो सके।
आंकड़ों के अनुसार, कक्षा एक से आठवीं तक के 6.29 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को 43.78 लाख से ज्यादा पुस्तकें वितरित की जाएंगी। वहीं कक्षा नौ से 12वीं तक के 3.44 lakh से अधिक विद्यार्थियों को 38.67 लाख से अधिक किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस प्रकार कुल 9.73 लाख छात्रों के लिए 82 लाख से अधिक पुस्तकों की आपूर्ति की जा रही है।
पिछले वर्षों में अक्सर देखा गया कि पुस्तक वितरण में देरी के कारण विद्यार्थियों को सत्र शुरू होने के कई महीने बाद तक किताबों का इंतजार करना पड़ता था। इससे शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था और कई बार शिक्षण कार्य अस्थायी नोट्स या पुरानी पुस्तकों के सहारे चलाना पड़ता था।
इस वर्ष विभाग ने समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर छपाई, भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया को पहले ही प्रारंभ कर दिया है। जिला स्तर पर निगरानी तंत्र भी सक्रिय किया गया है, जिससे वितरण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो। शिक्षा विभाग का मानना है कि समय पर पुस्तक उपलब्ध होने से न केवल छात्रों की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू होगी, बल्कि सीखने के स्तर में भी सुधार आएगा।
सरकारी और अशासकीय दोनों प्रकार के विद्यालयों को इस योजना का लाभ मिलेगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी छात्र पाठ्यपुस्तक के अभाव में अपनी पढ़ाई से वंचित न रहे।




