
हाथरस। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दुरुपयोग कर लोगों को ब्लैकमेल करने वाले एक शातिर गिरोह का साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के दो सदस्यों को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इसी ब्लैकमेलिंग से तंग आकर हाथरस के एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस अधीक्षक चिरंजीवनाथ सिन्हा ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहन बिहारीलाल सोनवणे और करन राजेंद्र चिंदालिया के रूप में हुई है, जिन्हें 24 जनवरी को छत्रपति संभाजी नगर (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार किया गया।
क्या था पूरा मामला
हाथरस के विष्णुपुरी निवासी युवक ने 9 अक्तूबर 2025 को फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना से पूरा परिवार टूट गया। बाद में जब परिजनों ने युवक का मोबाइल फोन देखा, तो उसमें ब्लैकमेलिंग से जुड़े मैसेज, कॉल और लेन-देन की जानकारी सामने आई।
मृतक के पिता ने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले ब्लैकमेल करने वालों का फोन आया था, जिसमें बेटे पर कर्ज होने की बात कही गई थी। जब उन्होंने बेटे से पूछा तो उसने इसे फर्जी बताया, लेकिन इससे पहले कि परिवार कुछ समझ पाता, युवक आत्महत्या कर चुका था।
एआई से बनाते थे फर्जी अश्लील कंटेंट
जांच में सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप और ऑनलाइन कॉलिंग ऐप्स के जरिए लोगों को संपर्क में लेते थे। पहले लड़की की आवाज में बात कर विश्वास जीतते, फिर एआई तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी अश्लील फोटो और वीडियो तैयार करते थे। इसके बाद इन्हीं फोटो-वीडियो के जरिए पीड़ित को बदनाम करने की धमकी देकर रुपये वसूलते थे।
आरोपियों ने मृतक युवक से चार बार में करीब 40 हजार रुपये अपने खातों में डलवा लिए थे और लगातार और पैसे की मांग कर रहे थे।
तकनीकी जांच से पहुंचे आरोपियों तक
पुलिस ने बैंक खातों, सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। साइबर पुलिस की टीम ने कई दिनों की मेहनत के बाद आरोपियों को महाराष्ट्र से दबोच लिया।
पुलिस की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को इस तरह की साइबर ब्लैकमेलिंग या फर्जी फोटो-वीडियो से धमकाया जा रहा हो, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर सूचना देने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
यह मामला न सिर्फ साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि एआई तकनीक के दुरुपयोग से पैदा हो रहे नए खतरों की ओर भी गंभीर चेतावनी देता है।





