
देहरादून। देहरादून जिले में मतदाताओं की संख्या पिछले दो दशकों में तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2003 में जहां जिले में लगभग 8.5 लाख मतदाता दर्ज थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 16 लाख तक पहुंच गई है। जिले में सबसे अधिक विस्तार देहरादून नगर निगम क्षेत्र का हुआ है, जहां मतदाताओं की संख्या में तीन गुना से भी ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी से जुड़े कारणों और संभावित अनियमितताओं को समझने के लिए प्रशासन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले प्री-एसआईआर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
प्री-एसआईआर के तहत बीएलओ घर-घर जाकर प्रतिदिन 30 मतदाताओं का मिलान कर रहे हैं। 2003 और 2005 की मतदाता सूचियों को आधार बनाते हुए पुराने और नए नामों के बीच अंतर को पहचानने तथा उसके कारणों की समीक्षा की जा रही है। वर्तमान मतदाता सूची के साथ इन आंकड़ों का मिलान भी किया जा रहा है ताकि मुख्य एसआईआर के लिए ठोस आधार तैयार किया जा सके। प्रशासन दिसंबर के अंत तक प्री-एसआईआर पूरा करने का लक्ष्य रख रहा है, जिसके बाद मुख्य एसआईआर की तिथि घोषित की जाएगी।
देश के 12 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पहले से चल रही है और उत्तराखंड में इसे जल्द शुरू किया जाना है। मुख्य एसआईआर के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा ताकि चुनावी सूची पूर्णतः निष्पक्ष रहे और किसी प्रकार की शिकायत न उठे।
देहरादून जिले में वर्तमान में कुल मतदाता लगभग 15.56 लाख के आसपास हैं, जिनमें करीब 8.9 लाख पुरुष और 7.47 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। अकेले देहरादून शहर में ही 7.71 लाख से अधिक मतदाता दर्ज हैं, और 2018 के नगर निगम चुनाव के बाद से यहां मतदाताओं की संख्या में 22 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। 2003 की तुलना में दून शहर में मतदाताओं की संख्या तीन गुना तक बढ़ चुकी है, जो तीव्र शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और नए वार्डों के गठन का संकेत देती है।
अब 45 वार्डों से बढ़कर नगर निगम 100 वार्डों तक विस्तारित हो चुका है, जिससे मतदाताओं की संख्या में सीधी वृद्धि देखी गई है। प्रशासनिक तैयारियों के बीच, बीएलओ और सुपरवाइजरों की टीमें लगातार फील्ड में जुटी हुई हैं ताकि प्री-एसआईआर को समयसीमा के भीतर पूर्ण किया जा सके।
सीडीओ अभिनव शाह के अनुसार, “देहरादून में प्री-एसआईआर चल रहा है। मुख्य एसआईआर अभी शुरू नहीं हुआ है और इसकी तिथि भी घोषित नहीं की गई है। बीएलओ को रोजाना 30 मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन करना है और उम्मीद है कि दिसंबर के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।”




