
वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी, उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट के निधन से पूरे राज्य में गहरा शोक व्याप्त है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे दिवाकर भट्ट ने मंगलवार की शाम हरिद्वार स्थित अपने शिवालोक कॉलोनी के घर में अंतिम सांस ली। लगातार पांच बार आए ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी थी। निधन से कुछ घंटे पहले ही उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल से हरिद्वार स्थित आवास पर लाया गया था। शाम करीब चार बजे उनके निधन की पुष्टि हुई। उनके निधन की सूचना फैलते ही प्रदेशभर से शोक संदेश आने शुरू हो गए और बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचने लगे।
आज उनके पार्थिव शरीर का खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। हरिद्वार के सभी सरकारी कार्यालय दिवाकर भट्ट के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप आज बंद रखे गए हैं। उनके आवास पर सुबह से ही राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, यूकेडी के पदाधिकारी, समर्थक और बड़ी संख्या में शहरवासी पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार दिवाकर भट्ट की अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी।
दिवाकर भट्ट उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उनका जन्म 1 अगस्त 1946 को टिहरी जनपद के सुपार गांव पट्टी बडियारगढ़ में हुआ था। राज्य आंदोलन के दौरान उनकी नेतृत्व क्षमता और संघर्षशीलता के कारण उन्हें व्यापक सम्मान मिला और बाद में वे उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने। राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक हरिद्वार को अपना कर्मभूमि बनाया। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति और राज्य आंदोलन के इतिहास के लिए एक अपूर्णीय क्षति बताया जा रहा है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, नगर विधायक मदन कौशिक और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उनके आवास पर जाकर श्रद्धांजलि दे चुके हैं। परिवार में उनके पुत्र ललित भट्ट, बहू, पौत्र और पोत्री हैं। शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने वालों का क्रम देर रात तक जारी रहा और सुबह भी लोगों की भीड़ लगातार उमड़ रही है। दिवाकर भट्ट की संघर्षशील राजनीतिक यात्रा और राज्य के प्रति समर्पण को याद करते हुए प्रदेशभर में शोक की लहर बनी हुई है।





