
देहरादून। उत्तराखंड में सौर ऊर्जा उत्पादक कंपनियों को बिजली की खरीद दरें बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उनकी मांग ठुकरा दी है। आयोग ने सोलर बिजली की खरीद दर बढ़ाकर 5.50 रुपये प्रति यूनिट करने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहले से निर्धारित जेनेरिक टैरिफ ही लागू रहेगा।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
आयोग ने चार जून 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सोलर पीवी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के पुराने टैरिफ को बरकरार रखने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सोसाइटी ने सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ने का हवाला देते हुए बिजली खरीद दर में बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने उसके तर्कों को पुनर्विचार के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
ग्रिड-इंटरएक्टिव सोलर परियोजनाओं के लिए लगभग 4.64 रुपये प्रति यूनिट दर
आयोग के चार जून के आदेश के तहत ग्रिड-इंटरएक्टिव सोलर पीवी परियोजनाओं, विशेषकर मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं के लिए वर्तमान टैरिफ लगभग 4.64 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित है। वहीं, नेट-मीटरिंग आधारित रूफटॉप और छोटे सोलर प्लांट के लिए बिजली खरीद दर दो रुपये प्रति यूनिट तय की गई है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
उत्पादक कंपनियां इन दरों में बढ़ोतरी चाहती थीं। उनका तर्क था कि सौर उपकरणों की लागत बढ़ने के कारण मौजूदा टैरिफ पर परियोजनाओं का संचालन और निवेश प्रभावित हो सकता है। हालांकि, आयोग ने पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पूर्व निर्धारित दरों को ही जारी रखने का फैसला किया।
घरेलू सोलर सेल और मॉड्यूल की बढ़ती कीमतों का दिया हवाला
आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी ने अपनी याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार और उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) की ओर से घरेलू सामग्री आवश्यकता तथा एएलएमएम लिस्ट-2 से संबंधित नियमों को अनिवार्य किए जाने के कारण सौर परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, आयातित सस्ते सोलर सेल उपलब्ध नहीं रहने से घरेलू बाजार पर निर्भरता बढ़ी है। इससे सोलर सेल और मॉड्यूल की कीमतों में वृद्धि हुई है। सोसाइटी ने दावा किया कि परियोजनाओं की लागत में 12 से 15 रुपये प्रति वाट तक बढ़ोतरी हुई है।
इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने सोलर मॉड्यूल की दर 25 रुपये प्रति वाट और बिजली खरीद टैरिफ 5.50 रुपये प्रति यूनिट करने की मांग की थी। उनका कहना था कि बढ़ी हुई लागत को देखते हुए मौजूदा दरों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
यूपीसीएल ने याचिका का किया विरोध
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने उत्पादक कंपनियों की पुनर्विचार याचिका का कड़ा विरोध किया। यूपीसीएल की ओर से तर्क दिया गया कि आयोग ने चार जून को मूल टैरिफ आदेश जारी करते समय सोलर मॉड्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रदेश की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखा था।
यूपीसीएल के अनुसार, इन पहलुओं पर विचार करने के बाद ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ निर्धारित किया गया था। ऐसे में उत्पादक कंपनियों की ओर से उठाए गए मुद्दे मूल आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाते।
स्पष्ट गलती या नए सबूत पर ही हो सकता है पुनर्विचार
आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, विधि सदस्य अनुराग शर्मा और तकनीकी सदस्य प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने कहा कि किसी आदेश पर पुनर्विचार तभी किया जा सकता है, जब उसमें कोई स्पष्ट गलती हो या नए साक्ष्य सामने आए हों। सुप्रीम कोर्ट के स्थापित फैसलों के अनुसार पुनर्विचार याचिका अपील का विकल्प नहीं है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल किसी आदेश से असंतुष्ट होने के आधार पर पुनर्विचार याचिका को अपील की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए तर्कों को इस प्रक्रिया के तहत पर्याप्त आधार नहीं मानते हुए आयोग ने याचिका को आधारहीन करार दिया और खारिज कर दिया।
2026-27 में पुरानी दरों पर ही होगी सोलर बिजली की खरीद
पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सौर बिजली की खरीद पर पहले से निर्धारित जेनेरिक टैरिफ ही लागू रहेगा। इससे बिजली खरीद दर बढ़ाने की उम्मीद कर रही उत्पादक कंपनियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है।
आयोग के फैसले के अनुसार, ग्रिड-इंटरएक्टिव सोलर पीवी परियोजनाओं के लिए लगभग 4.64 रुपये प्रति यूनिट और नेट-मीटरिंग आधारित रूफटॉप व छोटे सोलर प्लांट के लिए दो रुपये प्रति यूनिट की निर्धारित दरें जारी रहेंगी। सौर ऊर्जा उत्पादकों की ओर से लागत बढ़ने का हवाला देकर की गई दरों में संशोधन की मांग नियामक आयोग ने स्वीकार नहीं की।






