
कर्णप्रयाग (चमोली)। उत्तराखंड की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। सिमली में बेस अस्पताल की मांग, नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी और क्षेत्र में अधूरी विकास घोषणाओं को लेकर उठ रहे सवालों ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खास बात यह है कि इन मुद्दों पर विरोध करने वालों में भाजपा के पूर्व पदाधिकारी और पार्टी से जुड़े नेता भी शामिल हैं। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी भी घोषणाओं पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर मुखर हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
कर्णप्रयाग में भाजपा का रहा है दबदबा
कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का राजनीतिक आधार मजबूत रहा है। वर्ष 2002 से 2022 तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में यहां चार बार भाजपा को समर्थन मिला। केवल वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस के दिवंगत डॉ. एपी मैखुरी विधायक चुने गए थे।
हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव से पहले क्षेत्र में जनसमस्याओं को लेकर हो रहे आंदोलन पार्टी के लिए चुनौती बन रहे हैं। अस्पताल, शिक्षा और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
सिमली बेस अस्पताल की मांग पर भाजपा के पूर्व पदाधिकारी मुखर
सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का नेतृत्व भाजपा के पूर्व पदाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी कर रहे हैं। वह पहले जिला पंचायत सदस्य और पार्टी के मंडल महामंत्री रह चुके हैं। अस्पताल की मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने भाजपा से इस्तीफा देने की बात भी कही है।
स्थानीय स्तर पर बेस अस्पताल का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों की मांग और आंदोलन के बीच सरकार की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी होने का इंतजार है।
कर्णप्रयाग के विधायक अनिल नौटियाल का कहना है कि महिला बेस अस्पताल का नाम बेस अस्पताल कर दिया गया है। उनके मुताबिक, कुछ मानकों में शिथिलता देने की प्रक्रिया के कारण शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। इस विषय पर मुख्यमंत्री और सचिव स्तर पर लगातार वार्ता हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द शासनादेश जारी होगा।
नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मांग पर आंदोलन
नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मांग को लेकर भी आंदोलन चल रहा है। भाजपा के सोशल मीडिया विभाग के पदाधिकारी और पूर्व में भारतीय जनता युवा मोर्चा के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष रहे राकेश नेगी इस मुद्दे पर मुखर हैं।
शिक्षकों की मांग को लेकर वह 28 सितंबर से नंगे पांव चल रहे हैं। पार्टी से जुड़े नेता के इस तरह आंदोलन करने से क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था से संबंधित मांग चर्चा में है। यह मुद्दा भी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है।
अधूरी घोषणाओं को लेकर पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी नाराज
कर्णप्रयाग क्षेत्र में विकास कार्यों और पूर्व में की गई घोषणाओं पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठ रहा है। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी गैरसैंण में ग्रीष्मकालीन राजधानी क्षेत्र के विकास, झील निर्माण और अन्य घोषणाओं को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ने धरातल पर भाजपा सरकार को पूरी तरह विफल बताया है। इस तरह क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो रही है।
भाजपा जिलाध्यक्ष बोले- उचित मंच पर रखें अपनी बात
भाजपा के चमोली जिलाध्यक्ष गजपाल बल्र्वाल का कहना है कि जनसमस्याओं को उठाना अच्छी बात है। उनके मुताबिक, विधायक और संगठन इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और शिक्षा मंत्री से लगातार वार्ता कर रहे हैं।
उन्होंने भरोसा जताया कि समस्याओं का जल्द निस्तारण होगा। साथ ही पार्टी पदाधिकारियों से अपनी बात उचित मंच पर रखने की अपील की। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी से भी वार्ता किए जाने की बात कही।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
कर्णप्रयाग में सिमली बेस अस्पताल, नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मांग और अधूरी विकास घोषणाओं को लेकर उठ रहे सवाल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण हो गए हैं। भाजपा के अपने ही कुछ पूर्व पदाधिकारी और पार्टी से जुड़े नेता इन मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं।
विधायक अनिल नौटियाल और जिलाध्यक्ष गजपाल बल्र्वाल ने समस्याओं के समाधान के लिए सरकार तथा संबंधित अधिकारियों से वार्ता जारी होने की बात कही है। अब इन मुद्दों पर शासन स्तर से होने वाली कार्रवाई और स्थानीय समस्याओं के समाधान पर नजर रहेगी।





