
देहरादून। राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित बिधोली गांव में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक दंपती से 45.85 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने दंपती को उनके मोबाइल नंबर का आतंकी हमले में इस्तेमाल होने और जांच में फंसने का डर दिखाया। इसके साथ ही उनके तीनों बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी धमकाया गया। डर के कारण दंपती आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे और पांच बार में लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
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पीड़ित विजयपाल धीमान और उनकी पत्नी पुष्पा धीमान ने आठ अक्तूबर को पुलिस से शिकायत की। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने, संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है।
एटीएस और मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर किया फोन
शिकायत के अनुसार, 16 अगस्त के आसपास दंपती के पास अज्ञात लोगों के फोन आने शुरू हुए। फोन करने वालों ने खुद को मुंबई स्थित एटीएस मुख्यालय और क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इनमें से एक ने अपना नाम सब इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया।
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आरोपियों ने दंपती से कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल आतंकी हमले में हुआ है और वे जांच के दायरे में हैं। इस बात से दंपती घबरा गए। इसके बाद आरोपियों ने उनके तीनों बच्चों के बारे में जानकारी ली और उनकी जान को खतरा होने की बात कहकर परिवार को डराया।
60 घंटे तक वीडियो कॉल पर रखने का आरोप
पीड़ितों की शिकायत के मुताबिक, साइबर ठग लगातार फोन और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उनके संपर्क में रहे। दंपती को किसी अन्य व्यक्ति से बात नहीं करने दी गई। उन्हें जांच के नाम पर निर्देश दिए जाते रहे और किसी को जानकारी देने से रोका गया।
शिकायत में बताया गया है कि अंतिम दौर में एक वीडियो कॉल करीब 60 घंटे तक जुड़ी रही। आरोपियों के दबाव और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पैदा किए गए डर के कारण दंपती ने किसी को इस मामले की जानकारी नहीं दी। वे आरोपियों के निर्देशों के अनुसार रकम जमा करते रहे।
पांच बार में ट्रांसफर किए 45.85 लाख रुपये
शिकायत के अनुसार, 21 से 27 अगस्त के बीच दंपती ने पांच बार में कुल 45.85 लाख रुपये जमा किए। इनमें चार बार अलग-अलग बैंक खातों से आरटीजीएस के जरिए रकम भेजी गई, जबकि एक बार बैंक शाखा में नकद जमा कराया गया।
शिकायत में जिन खातों में रकम जमा किए जाने का उल्लेख है, उनमें सनातन ट्रेडर्स के खाते में 15 लाख रुपये, प्रागज्योतिष एंटरप्राइजेज के खाते में 11.35 लाख रुपये, इंटीमेटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 11.50 लाख रुपये, शांबा मुराम के खाते में पांच लाख रुपये और आदित्य संदीप महाराज के नाम से जुड़े खाते में तीन लाख रुपये शामिल हैं।
इस तरह कुल 45.85 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा कराए गए। आरोप है कि इसके बाद भी ठगों ने दंपती पर दबाव बनाना जारी रखा और जमीन बेचकर अतिरिक्त रकम देने को कहा।
बेटी के पहुंचने पर खुला मामला
तीन अक्तूबर को दंपती की बेटी अचानक घर पहुंची। उसने अपने माता-पिता को लंबे समय से वीडियो कॉल पर बात करते देखा तो उनसे पूछताछ की। इस दौरान दंपती घबरा गए और उन्होंने कॉल काट दी। शिकायत के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों की ओर से फोन नहीं आया।
बाद में दंपती ने पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। आठ अक्तूबर को दी गई शिकायत में उन्होंने रकम वापस दिलाने और आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
बैंक खातों को फ्रीज करने और जांच की मांग
पीड़ित दंपती ने पुलिस से संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने, उनमें हुए लेनदेन की जांच करने और ठगी में शामिल लोगों की पहचान करने का अनुरोध किया है। उन्होंने अलग-अलग खातों में जमा कराई गई रकम वापस दिलाने की भी मांग की है।
यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग किस तरह जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर और परिवार की सुरक्षा का डर दिखाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे मामलों में किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर रकम ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यमों से पुष्टि करना जरूरी है।





