
देहरादून। उत्तराखंड में सतर्कता अधिष्ठान यानी विजिलेंस के मौजूदा ढांचे में बड़ा बदलाव किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चार अक्तूबर को चंपावत स्थित एनएचपीसी बनबसा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में विजिलेंस अधिष्ठान के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत वर्तमान व्यवस्था में शामिल कुछ पदों को समाप्त किया जाएगा, जबकि आवश्यकता के अनुसार विभिन्न संवर्गों में नए पद सृजित किए जाएंगे।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार विजिलेंस अधिष्ठान में आठ कांस्टेबल नागरिक पुलिस, एक कांस्टेबल डाक रनर और दो कांस्टेबल चालक के पद समाप्त किए जाएंगे। इस तरह कुल 11 पदों को खत्म करने का निर्णय लिया गया है।
छह नए पदों का होगा सृजन
पदों के पुनर्गठन के तहत विजिलेंस में छह नए पद सृजित किए जाएंगे। इनमें एएसआई सिविल पुलिस के तीन पद, हेड कांस्टेबल डाक रनर का एक पद, हेड कांस्टेबल चालक का एक पद और एएसआई चालक का एक पद शामिल है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
इसके अलावा हेड कांस्टेबल नागरिक पुलिस के पांच पदों में वृद्धि की जाएगी। इस बदलाव के जरिए विजिलेंस अधिष्ठान में विभिन्न संवर्गों के पदों की मौजूदा व्यवस्था को जरूरत के अनुरूप व्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा।
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक पुराने पदों को समाप्त करने और नए पदों के सृजन के साथ विजिलेंस के मानव संसाधन ढांचे में बदलाव होगा। सरकार का उद्देश्य सतर्कता अधिष्ठान को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।
सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति में वैकल्पिक व्यवस्था
मंत्रिमंडल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 19 की उपधारा (3) के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी भी दी है।
इस व्यवस्था के तहत निर्धारित परिस्थितियों में जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार को 14 दिन का नोटिस देने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को संबंधित मामले के लिए सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकेंगे। इसका उद्देश्य आवश्यकता पड़ने पर अभियोजन कार्य के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
इस फैसले के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए किसी मामले में सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति का रास्ता उपलब्ध हो सकेगा। मंत्रिमंडल ने इसे अभियोजन से जुड़े प्रावधानों के तहत मंजूरी दी है।
वर्ष 1965 की विजिलेंस अधिसूचना में होगा संशोधन
कैबिनेट ने विजिलेंस से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह संशोधन भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद उसमें किए गए कानूनी बदलावों के अनुरूप किया जाएगा।
इसका उद्देश्य विजिलेंस अधिष्ठान से संबंधित पुराने प्रावधानों को वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुरूप बनाना है। इसके लिए अधिसूचना में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, ताकि पुराने आईपीसी और सीआरपीसी से जुड़े प्रावधानों तथा वर्तमान न्याय संहिताओं के बीच सामंजस्य स्थापित किया जा सके।
विजिलेंस के कामकाज को व्यवस्थित करने पर जोर
विजिलेंस अधिष्ठान के पुनर्गठन, नए पदों के सृजन और पुराने पदों को समाप्त करने के फैसले को सतर्कता व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पदों की संरचना में बदलाव के साथ विभिन्न संवर्गों में जिम्मेदारियों और मानव संसाधन की व्यवस्था को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा।
कैबिनेट के इन फैसलों में एक ओर विजिलेंस अधिष्ठान के पदों का पुनर्गठन किया गया है, वहीं दूसरी ओर अभियोजन से जुड़े प्रावधानों को लागू करने और पुराने नियमों को वर्तमान न्याय संहिता के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया गया है।





