
देहरादून/ऊधमसिंह नगर/चंपावत/बागेश्वर। उत्तराखंड में बारिश का दौर लगातार जारी है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे तराई से लेकर पर्वतीय क्षेत्रों तक जनजीवन प्रभावित हुआ है। कहीं सड़कों पर मलबा आने से यातायात बाधित हुआ तो कहीं खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी भरने की स्थिति बनी। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र लगातार निगरानी कर रहा है।
चंपावत में 160 मिमी बारिश, दो एनएच और एक स्टेट हाईवे प्रभावित
चंपावत जिले में शुक्रवार से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला रविवार सुबह तक जारी रहा। आपदा कंट्रोल रूम के अनुसार पिछले 24 घंटों में जिले में 160 मिमी बारिश दर्ज की गई। टनकपुर में 95 मिमी, बनबसा में 78 मिमी, पाटी में 42 मिमी और लोहाघाट में 30 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
लगातार बारिश के कारण शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बारिश के चलते जिले में दो राष्ट्रीय राजमार्ग और एक राज्य राजमार्ग पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ। संबंधित विभागों की मशीनें मार्गों से मलबा हटाने में जुटी हैं, ताकि आवाजाही को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
ऊधमसिंह नगर में किच्छा में सबसे अधिक बारिश
तराई क्षेत्र के ऊधमसिंह नगर जिले में भी पिछले 24 घंटों के दौरान जमकर बारिश हुई। रविवार सुबह आठ बजे तक जिले की सभी तहसीलों में बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट आई। रविवार को जिले में अधिकतम तापमान करीब 24 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
जिला आपदा प्रबंधन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार किच्छा में सबसे अधिक 137 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा जसपुर में 135 मिमी, काशीपुर में 133 मिमी, गदरपुर में 115 मिमी, बाजपुर में 106 मिमी, रुद्रपुर में 105 मिमी, खटीमा में 102 मिमी और सितारगंज में 86 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
हालांकि भारी बारिश के बावजूद जिले की प्रमुख नदियां फिलहाल सामान्य स्तर पर बह रही हैं। बेगूल नदी में 5560 क्यूसेक, कैलाश में 7120 क्यूसेक, जगबूड़ा में 8680 क्यूसेक और देवहा में 9328 क्यूसेक जल प्रवाह दर्ज किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी नदियां चेतावनी स्तर से नीचे हैं।
जिले के प्रमुख जलाशयों—बैगुल, नानक सागर, शारदा सागर, बौर, हरिपुरा, तुमड़िया और धौरा—का जलस्तर भी फिलहाल सामान्य बताया गया है। सड़क, बिजली, संचार और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहने की जानकारी दी गई है।
बागेश्वर में मूसलाधार बारिश, तीन प्रमुख मार्ग बंद
बागेश्वर जिले में शुक्रवार देर रात से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का सिलसिला रविवार सुबह तक जारी रहा। आपदा नियंत्रण कक्ष के अनुसार पिछले 24 घंटों में जिले में औसतन 62 मिमी बारिश दर्ज की गई।
कपकोट क्षेत्र में सर्वाधिक 68 मिमी बारिश हुई, जबकि बागेश्वर और गरुड़ में 59-59 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के बावजूद जिला मुख्यालय में सरयू और गोमती नदियों का जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया गया है।
सरयू नदी का जलस्तर 866.40 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 869.70 मीटर से करीब तीन मीटर नीचे है। वहीं गोमती नदी का जलस्तर 863.30 मीटर रहा। दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
गरुड़ स्थित बैजनाथ बैराज में झील का जलस्तर 1113.20 मीटर दर्ज किया गया। बैराज से नीचे की ओर करीब 949.72 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
मलबा आने से यातायात प्रभावित
बारिश के कारण रविवार सुबह तक बागेश्वर जिले के तीन प्रमुख मोटर मार्ग यातायात के लिए बंद हो गए। रवाईंखाल के पास सड़क पर भारी मलबा आने से यातायात ठप हो गया। मार्ग को दोपहर तक खोलने का लक्ष्य रखा गया था।
तुपेड़ के पास किलोमीटर संख्या 43 पर भी मलबा आने से मार्ग बाधित हुआ। यहां जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम किया गया। वहीं मानसून के दौरान लगातार भूधंसाव की समस्या को देखते हुए एक मार्ग को सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया है।
पहाड़ों में भूस्खलन और तराई में जलभराव की चिंता
लगातार बारिश के कारण पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर तराई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण खेतों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है। लगातार बारिश का असर कृषि कार्यों पर भी पड़ रहा है और कुछ क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की सूचना सामने आई है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा रही है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सड़क पर मलबा या जलभराव होने की स्थिति में जोखिम न लेने की अपील की है। पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वालों को रवाना होने से पहले संबंधित मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।
फिलहाल राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का प्रभाव बना हुआ है और प्रशासन की टीमें सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की स्थिति पर नजर रख रही हैं।




