
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के बीच शनिवार से लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन और पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही को प्रभावित किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। देहरादून में लगातार बारिश के साथ तेज हवाओं और गरज-चमक की चेतावनी भी दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, पौड़ी और टिहरी के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में भी भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। देहरादून के कुछ हिस्सों के लिए IMD के स्थानीय पूर्वानुमान में 27 सितंबर को बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दर्ज की गई है।
मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने, भूस्खलन संभावित मार्गों पर सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
बारिश और भूस्खलन से 57 मार्ग बंद
लगातार बारिश के कारण प्रदेश में कई स्थानों पर सड़कें बंद हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में 57 मार्गों पर यातायात प्रभावित है। इनमें अल्मोड़ा में दो, बागेश्वर में चार, चमोली में आठ, देहरादून में आठ और नैनीताल में 11 मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा पौड़ी में तीन, पिथौरागढ़ में 11, रुद्रप्रयाग में तीन, टिहरी में पांच और उत्तरकाशी में दो सड़कें बंद बताई गई हैं। मार्ग बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने की आशंका भी बनी हुई है।
नदियों का जलस्तर बढ़ा
बारिश के कारण उत्तराखंड की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर भी बढ़ा है। हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी तथा बागेश्वर में सरयू नदी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को मौसम विभाग के अलर्ट के आधार पर आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा रविवार तक स्थगित
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश और मौसम की खराब स्थिति को देखते हुए चारधाम यात्रा रविवार तक स्थगित कर दी गई है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है। यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को मौसम सामान्य होने तक यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यात्रियों को ट्रांजिट कैंप में रुकने की सलाह दी गई है। यात्रा स्थगित किए जाने के बाद ऋषिकेश स्थित एआरटीओ कार्यालय में चारधाम यात्रा से संबंधित ग्रीन कार्ड और ट्रिप कार्ड का काम भी रोक दिया गया है।
चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा से संबंधित आधिकारिक पंजीकरण एवं जानकारी के लिए उत्तराखंड पर्यटन का पोर्टल उपलब्ध है।
कई इलाकों में हुई भारी बारिश
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग मात्रा में बारिश दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ऊधमसिंह नगर के गुलरभोज में 91.5 मिमी, काशीपुर में 89 मिमी और गदरपुर में 86 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
नैनीताल जिले के कोश्याकुटोली में 87.5 मिमी, नैनीताल में 78.5 मिमी और धारी में 66.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई। चंपावत के पाटी में 72.5 मिमी, लोहाघाट में 68.5 मिमी और चंपावत में 60.5 मिमी बारिश हुई।
पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा में 65 मिमी, लैंसडौन में 54 मिमी और कालागढ़ में 52.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अल्मोड़ा के जैंती में 63 मिमी, शीतलाखेत में 61.5 मिमी और रानीखेत में 57.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। देहरादून के निरंजनपुर में 57 मिमी वर्षा दर्ज की गई।
इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश
देहरादून के रायवाला में 20.5 मिमी और चकराता में 18.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई। पिथौरागढ़ के गनाई गंगोली में 47.5 मिमी, बागेश्वर के डंगोली में 47 मिमी और उत्तरकाशी के जानकी चट्टी में 43 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
चमोली के पोखरी में 42 मिमी और रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में 26 मिमी वर्षा हुई। हरिद्वार के खानपुर में 23.5 मिमी तथा टिहरी गढ़वाल के चंबा में 19.5 मिमी बारिश दर्ज की गई।
प्रशासन की स्थिति पर नजर
आपदा प्रबंधन तंत्र और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की ओर से मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग से प्राप्त चेतावनियों के आधार पर संबंधित जिलों को सतर्क किया जा रहा है।
IMD के अनुसार देहरादून में 28 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी हुई है, जबकि इसके बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव की संभावना है।
फिलहाल पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों के लिए मौसम की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। सड़क बंद होने, भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यात्रियों को प्रशासन और मौसम विभाग की ताजा एडवाइजरी के अनुसार ही यात्रा की योजना बनाने की सलाह दी गई है।




