
कानपुर। नगर निगम में टेंडर और फर्म पंजीकरण से जुड़े कथित घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। बुधवार को बारावफात की छुट्टी के दिन भी विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने नगर निगम मुख्यालय में करीब सात घंटे तक डेरा डालकर अभियंत्रण विभाग से जुड़े दस्तावेजों और फाइलों की गहन पड़ताल की। एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में पहुंची चार सदस्यीय टीम ने टेंडर प्रक्रिया, फर्म पंजीकरण, काम के आवंटन और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की।
भारी पुलिस बल के साथ एसआईटी बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे मोतीझील स्थित नगर निगम मुख्यालय पहुंची। टीम ने सबसे पहले अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों से संबंधित अभिलेख मांगे। मुख्य अभियंता सैय्यद फरीद अख्तर जैदी से हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े दस्तावेज और भुगतान की फाइलें उपलब्ध कराने को कहा गया। इसके अलावा एफआईआर में आरोपी बनाए गए ठेकेदारों और उनसे संबंधित फर्मों की टेंडर फाइलें भी मंगाई गईं।
जांच के दौरान टीम ने गिरफ्तार ठेकेदार संदीप जैन और रज्जन बाजपेई के साथ फरार चल रहे गोविंद शर्मा से जुड़ी फर्मों के दस्तावेज भी खंगाले। एसआईटी को कई दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलीं। खास बात यह रही कि टीम को जांची गई फाइलों में नंबरिंग नहीं मिली। इस पर अधिकारियों से सवाल किया गया तो मुख्य अभियंता ने फाइलों में कमियां होने की बात स्वीकार की।
ब्लैक लिस्ट न करने पर अधिकारियों से सवाल
जांच के दौरान एसआईटी ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि जब पहली बार टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई थी, तब संबंधित फर्मों के खिलाफ ब्लैक लिस्ट करने अथवा नोटिस जारी करने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस सवाल ने नगर निगम की पूर्व की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिशासी अभियंता आरके सिंह, दिवाकर भास्कर और कमलेश पटेल से भी टीम ने टेंडर प्रक्रिया, हॉट मिक्स प्लांट से जुड़े कार्यों और भुगतान की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान एसआईटी ने पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए।
एक दर्जन से अधिक फाइलें साथ ले गई टीम
करीब सात घंटे तक चली जांच के बाद शाम साढ़े छह बजे एसआईटी टीम नगर निगम मुख्यालय से रवाना हुई। टीम अपने साथ फर्म पंजीकरण, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से जुड़ी एक दर्जन से अधिक फाइलें ले गई। इसके अलावा अभियंत्रण विभाग के कई दस्तावेजों की फोटो भी खींची गई और डिजिटल रिकॉर्ड पेन ड्राइव में लिया गया।
एसआईटी ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले नगर निगम के अधिशासी अभियंताओं के बयान भी दर्ज किए। इन बयानों की वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और अधिकारियों के बयानों का मिलान किया जा सके।
बागी पार्षद भी नगर निगम पहुंचे
एसआईटी के नगर निगम मुख्यालय पहुंचने की जानकारी मिलते ही बागी भाजपा पार्षद विकास जायसवाल, पवन गुप्ता, लक्ष्मी कोरी और आलोक पांडेय भी वहां पहुंच गए। उन्होंने जांच टीम से मिलने का प्रयास किया, लेकिन एसआईटी अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया पर ही ध्यान केंद्रित रखा। बागी पार्षद नगर निगम के केयरटेकर कार्यालय में घंटों बैठे रहे और टीम की जांच पूरी होने का इंतजार करते रहे।
पांच फर्मों के खिलाफ एफआईआर
नगर निगम टेंडर मामले में अब तक पांच फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें मेसर्स तिरुपति ट्रेडर्स की मालकिन प्रार्थना शर्मा, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स के मालिक संदीप जैन, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज के मालिक अजय कुमार बाजपेई, मेसर्स दिलीप बाजपेई के मालिक दिलीप बाजपेई और मेसर्स कैला देवी कंस्ट्रक्शन के मालिक गोविंद शर्मा शामिल हैं।
एसआईटी प्रभारी एडीसीपी डॉ. अर्चना सिंह के अनुसार, जांच के दौरान नगर निगम से कुछ दस्तावेज कब्जे में लिए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और फर्म पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया जा रहा है। यदि जांच में कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।







