
देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सम-सेमेस्टर परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी शिक्षक ने परीक्षा से पहले व्हाट्सएप ग्रुप और छात्रों के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऐसे प्रश्न साझा किए थे, जिनका वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल पाया गया। मामले के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेज की संयुक्त जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार हाल ही में आयोजित सम-सेमेस्टर परीक्षा के बाद उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि देहरादून स्थित शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कार्यरत एक सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे। विश्वविद्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों का मिलान कराया, जिसमें शिकायत में बताए गए कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते पाए गए।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, छात्रों के पोर्टल और व्हाट्सएप पर साझा की गई सामग्री की पड़ताल की गई। समिति ने पाया कि आरोपी सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों तक पहुंचाए थे, जिससे परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने सहारनपुर निवासी आशीष कुमार गुप्ता (40) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत था। पुलिस अब मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
मामले के सामने आने के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग प्रशासन ने आरोपी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की। कॉलेज के निदेशक प्रो. टी.एस. सिद्धू ने बताया कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उनका इंक्रीमेंट भी रोक दिया गया था। संस्थान और विश्वविद्यालय की संयुक्त जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।
विश्वविद्यालय प्रशासन अब आरोपी के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता और पारदर्शिता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर गंभीर बहस चल रही है। ऐसे में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की परीक्षा में सामने आए इस प्रकरण ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाएगा।




