
चमोली। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोपी वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल को निलंबित किए जाने और मामले की जांच गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को सौंपे जाने के साथ ही बीकेटीसी से जुड़े पुराने विवाद भी फिर चर्चा में आ गए हैं। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।
वर्तमान प्रकरण ने बीकेटीसी की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों को फिर से हवा दे दी है। इससे पहले भी समिति पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। उन मामलों की जांच जिला पुलिस से लेकर पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्तर तक पहुंची थी, लेकिन जांच के अंतिम निष्कर्ष या दोषियों के खिलाफ हुई कार्रवाई सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो सकी। इससे मंदिर समिति की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
वर्ष 2023 में बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं से डिजिटल माध्यम से दान प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था लागू की गई थी। मंदिर परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त दान राशि किस खाते में जमा हुई, उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया और राशि का उपयोग किन कार्यों में किया गया, इसे लेकर भी कई सवाल उठे थे। हालांकि इस मामले में भी कोई स्पष्ट और सार्वजनिक रिपोर्ट सामने नहीं आई, जिससे विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका।
बीकेटीसी पहले भी नियुक्तियों को लेकर विवादों का सामना कर चुकी है। वर्ष 2020 में समिति में कथित रूप से नियमों के विपरीत नियुक्तियां किए जाने का मामला सामने आया था। मामला तूल पकड़ने पर तत्कालीन अध्यक्ष स्वर्गीय मोहन प्रसाद थपलियाल को विवादित नियुक्तियों को निरस्त करना पड़ा था। इस घटना ने समिति की भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए थे।
अब बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर बीकेटीसी की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले के उजागर होने के बाद समिति ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए हैं। गणना कक्ष से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जांच के दौरान सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा सके।
बीकेटीसी ने आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के साथ ही उन्हें दान गणना और प्रोटोकॉल से जुड़े सभी दायित्वों से भी हटा दिया है। दूसरी ओर, सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को पूरे घटनाक्रम, चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय नियंत्रण और संभावित अनियमितताओं की जांच कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचकर मंदिर में दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शी गणना और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना मंदिर समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी जाती है। ताजा प्रकरण के बाद अब श्रद्धालुओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार जांच के आधार पर न केवल दोषियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि भविष्य में चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।




