
चमोली। नगरासू गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में विरोध और राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। निहंगों के खिलाफ कथित रूप से पर्याप्त कार्रवाई न होने के आरोपों के बीच बुधवार को रुद्रप्रयाग के गुलाबराय मैदान में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी और कर्णप्रयाग क्षेत्र से आए लोगों ने भाग लिया और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 16 जून को कर्णप्रयाग और नगरासू क्षेत्र में हुए विवाद के बाद स्थानीय लोगों में असंतोष बना हुआ है। उनका आरोप है कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित किए बिना मामले को दूसरे जिले में स्थानांतरित करने से लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, जिला पंचायत चमोली की बोर्ड बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में कई जनप्रतिनिधियों ने कर्णप्रयाग-नगरासू विवाद की जांच चमोली पुलिस को सौंपने की मांग की। उनका तर्क था कि स्थानीय परिस्थितियों और घटनाक्रम की बेहतर जानकारी होने के कारण जिले की पुलिस जांच को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकती है।
उधर, पुलिस प्रशासन भी मामले की जांच में जुटा हुआ है। 16 जून को हुए विवाद में दो स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने तीन निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि एक अन्य निहंग का श्रीनगर बेस अस्पताल में पुलिस निगरानी में उपचार चल रहा है। बाद में सिख समुदाय द्वारा पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाए गए, जिसके बाद दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज की गईं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग ने दोनों प्राथमिकी और पुलिस कार्रवाई की जांच हरिद्वार पुलिस को सौंप दी है। इसी क्रम में डीआईजी यशवंत सिंह जांच की प्रगति का आकलन करने के लिए क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल और संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाई। बताया गया है कि वे कुछ दिनों तक मामले से जुड़ी पुलिस कार्यवाही की समीक्षा करेंगे और अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे।
जांच के दौरान स्थानीय व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने डीआईजी यशवंत सिंह के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में मांग की गई कि जांच को हरिद्वार स्थानांतरित करने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही घटना में घायल स्थानीय लोगों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करे। प्रदर्शनकारियों ने चारधाम यात्रा के दौरान हथियारों पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी रखी।
व्यापार संघ के प्रतिनिधियों ने पुलिस चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर नगर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि कर्णप्रयाग और नगरासू जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को पहले से अधिक सतर्क रहना होगा। उन्होंने बाजार क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने की भी मांग की।
इस बीच, राज्य के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा है कि कर्णप्रयाग और नगरासू में हुई घटनाओं को पुलिस और प्रशासन ने विभिन्न संगठनों के सहयोग से संयम और धैर्य के साथ नियंत्रित किया। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने वालों की गतिविधियां पुलिस के संज्ञान में हैं और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
नगरासू प्रकरण अब केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।




