
रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा तथा आक्रामक कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि हर महीने 450 से अधिक लोग कुत्तों के हमलों और काटने की घटनाओं का शिकार बन रहे हैं। बढ़ते मामलों ने आम लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वहीं, जिला अस्पताल में रेबीज रोधी टीका लगवाने के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और चिकित्सकों के अनुसार गर्मियों के मौसम, विशेषकर मई और जून के महीनों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय कुत्तों के प्रजनन काल का होता है, जिसके कारण वे अधिक चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। इसी वजह से सड़कों, कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में लोगों पर अचानक हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।
शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड दिन और रात दोनों समय घूमते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और सुबह-शाम टहलने निकलने वाले बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर कुत्तों के झुंड राहगीरों का पीछा करते हैं और वाहन चालकों के लिए भी दुर्घटना का कारण बनते हैं।
लगातार बढ़ते मामलों का असर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रेबीज रोधी टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इससे टीकाकरण केंद्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि रेबीज से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में टीकों का भंडारण किया गया है और किसी भी मरीज को बाहर से टीका खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एम.के. तिवारी ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते, बिल्ली या बंदर जैसे किसी भी जानवर के काटने की घटना को हल्के में न लें। ऐसे मामलों में रेबीज संक्रमण का खतरा बना रहता है, इसलिए तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेकर निर्धारित टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है और सभी मरीजों को समय पर उपचार दिया जा रहा है।
उधर, नगर निगम भी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों के लिए जल्द ही एक डॉग होम का निर्माण कराया जाएगा। इस सुविधा के बनने के बाद सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को सुरक्षित रूप से वहां रखा जा सकेगा, जिससे लोगों को राहत मिलेगी और आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल डॉग होम बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कुत्तों की नसबंदी, नियमित टीकाकरण और आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए व्यापक अभियान चलाने की भी आवश्यकता है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और नगर निगम जल्द प्रभावी कदम उठाकर इस बढ़ती समस्या का समाधान करेंगे, ताकि शहरवासियों को भयमुक्त वातावरण मिल सके।




