
ऊधम सिंह नगर जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अत्याधुनिक हथियारों की बरामदगी के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान सीमा से शुरू होकर पंजाब के रास्ते उत्तराखंड के तराई क्षेत्र तक अवैध हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस, एसओजी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के कई जिलों में ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीले पदार्थ गिराए जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। अब फर्जी शस्त्र लाइसेंसों और अवैध हथियारों की बरामदगी के बाद उत्तराखंड के तराई क्षेत्र से भी ऐसे नेटवर्क के संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक काशीपुर, बाजपुर, सितारगंज और नानकमत्ता क्षेत्रों में अवैध हथियारों की मौजूदगी और संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों को कुछ महत्वपूर्ण इनपुट प्राप्त हुए हैं। इन सूचनाओं के आधार पर विभिन्न स्तरों पर निगरानी और सत्यापन की कार्रवाई चल रही है।
पंजाब से जांच के सिलसिले में पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए पिस्तौल, कारतूस और मादक पदार्थ भेजे जाने के कई मामले पहले दर्ज हो चुके हैं। पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने समय-समय पर बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और ड्रग्स बरामद किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि तस्कर सीमा के निकट स्थित खेतों को भारी रकम देकर किराये पर लेते हैं और उन्हें अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करते हैं।
इसी बीच ऊधम सिंह नगर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदने और उनके उपयोग से जुड़े मामलों ने जांच को और गंभीर बना दिया है। एसओजी की ओर से 12 जून को कुंडा थाने में चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद से जांच एजेंसियां आरोपियों और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी लाइसेंस, अवैध हथियार और संभावित तस्करी नेटवर्क के बीच कोई संगठित संबंध है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि तराई क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और विभिन्न राज्यों से जुड़ाव इसे तस्करों के लिए संवेदनशील बना सकता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान करना और समय रहते कार्रवाई करना बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल पुलिस और एसओजी की टीमें संदिग्धों की धरपकड़ और नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं।



