
देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी लगभग चार वर्ष बाद उत्तराखंड के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके दो दिवसीय कार्यक्रम को प्रदेश कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा में बड़े राजनीतिक अभियान की शुरुआत के रूप में देख रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि राहुल गांधी का यह दौरा वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के चुनावी शंखनाद का काम करेगा। अल्मोड़ा में विशाल जनसभा, पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन और देहरादून में संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से कांग्रेस प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता को नई धार देने की तैयारी में है।
राहुल गांधी अपने दौरे के पहले दिन अल्मोड़ा के सिमकनी मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करेंगे। इस सभा में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। पार्टी नेताओं के अनुसार जनसभा के माध्यम से कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। साथ ही प्रदेश और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए जनता के बीच अपना राजनीतिक संदेश पहुंचाने का प्रयास करेगी।
अल्मोड़ा में जनसभा के बाद राहुल गांधी पौड़ी पहुंचेंगे, जहां उनका पूर्व सैनिक सम्मेलन में भाग लेने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उत्तराखंड को सैनिकों और पूर्व सैनिकों की भूमि माना जाता है और कांग्रेस इस वर्ग को साधने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। सम्मेलन में राहुल गांधी अग्निपथ योजना, वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी), एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस), पूर्व सैनिकों की पेंशन को आयकर के दायरे में लाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए भाजपा सरकार को घेर सकते हैं। पार्टी का मानना है कि इन विषयों पर पूर्व सैनिक समुदाय के बीच व्यापक चर्चा और असंतोष मौजूद है, जिसे राजनीतिक रूप से प्रभावी मुद्दा बनाया जा सकता है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि राहुल गांधी अपने दौरे के दौरान कोटद्वार में जिम संचालक मोहम्मद दीपक से मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा चर्चाएं यह भी हैं कि वह चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े परिवार के सदस्यों से भी मिलने पहुंच सकते हैं। हालांकि कांग्रेस ने इन कार्यक्रमों को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है और न ही इनकी पुष्टि की है। इसके बावजूद संभावित मुलाकातों को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है। यदि यह मुलाकातें होती हैं तो इनके राजनीतिक और सामाजिक संदेशों पर व्यापक चर्चा हो सकती है।
दौरे के दौरान राहुल गांधी का रात्रि विश्राम मसूरी में प्रस्तावित है। इसके बाद पांच जून को वह देहरादून में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिला अध्यक्षों, महानगर इकाइयों, फ्रंटल संगठनों और विभिन्न अनुषांगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन की स्थिति, जनसंपर्क कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही विभिन्न जिलों से फीडबैक लेकर संगठन को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी।
राहुल गांधी के दौरे को सफल बनाने के लिए कांग्रेस संगठन ने व्यापक तैयारियां की हैं। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा सहित पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता अल्मोड़ा पहुंच चुके हैं। सभी नेता कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां से राहुल गांधी के दौरे की तैयारियों की लगातार समीक्षा की जा रही है। कंट्रोल रूम के माध्यम से जिला और ब्लॉक स्तर तक के पदाधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि कार्यक्रमों में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि अल्मोड़ा की जनसभा प्रदेश की राजनीति में नया संदेश देगी और आगामी चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेगी।
वहीं राहुल गांधी के संभावित कोटद्वार दौरे को लेकर भाजपा ने भी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास करती रही है। उन्होंने कहा कि राज्य और देश की जनता कांग्रेस की राजनीति को भलीभांति समझती है और ऐसे प्रयासों का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ने वाला है।
कुल मिलाकर राहुल गांधी का यह उत्तराखंड दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी इस दौरे के माध्यम से संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और भाजपा के खिलाफ जनमत तैयार करने की कोशिश करेगी। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर रहेगी कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों का प्रदेश की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा पर कितना प्रभाव पड़ता है।




