
देहरादून। भगवद्गीता को लेकर समाज में फैली सीमित धारणाओं पर प्रहार करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा है कि भगवद्गीता किसी एक धर्म या वर्ग तक सीमित ग्रंथ नहीं है। जो भी व्यक्ति इसे पढ़ता है, उसे ऐसा अनुभव होता है कि गीता विशेष रूप से उसी के लिए लिखी गई है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि महाभारत के समय अर्जुन जिस प्रकार संशय, भय और दुविधा से घिरे हुए थे, आज का युवा भी उसी प्रकार मानसिक उलझनों, प्रतिस्पर्धा और तनाव से जूझ रहा है। ऐसे समय में भगवद्गीता जीवन को दिशा देने वाला ग्रंथ है, जो चुनौतियों को चुनौती देने की क्षमता प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि आज का जीवन ही आधुनिक महाभारत बन चुका है। वैज्ञानिक और तकनीकी सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन इसके साथ-साथ मानसिक तनाव, चिंता और अकेलापन भी बढ़ा है। भगवद्गीता युवाओं को सकारात्मक, रचनात्मक और आत्मविश्वासी बनने की प्रेरणा देती है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज के अनुसार, गीता मुख्य रूप से युवाओं के लिए ही है, क्योंकि युवाओं के भीतर अपार ऊर्जा होती है, लेकिन वे स्वयं उसकी पहचान नहीं कर पाते। गीता आत्मचिंतन और आत्मजागरण का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में उलझा हुआ है। गीता यह सिखाती है कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर बेहतर बनने की जिज्ञासा नहीं जगाता, तब तक वह भटकता रहता है। गीता पढ़ते-पढ़ते व्यक्ति की क्षमता स्वतः बढ़ती जाती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने रिश्तों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज रिश्तों में आत्मीयता कम होती जा रही है। जब तक दूसरों की भावनाओं का सम्मान नहीं किया जाएगा, तब तक रिश्ते मजबूत नहीं होंगे। प्रेम पाने के लिए प्रेम बांटना आवश्यक है और भगवद्गीता पारस्परिक प्रेम और सौहार्द को बढ़ाने का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि गीता का प्रत्येक श्लोक प्रेरणादायक है। गीता स्पष्ट रूप से कहती है कि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु। बुरी आदतों में उलझकर व्यक्ति खुद का शत्रु बन जाता है, जबकि आत्मसंयम और सद्विचार से वह स्वयं को ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने इस भ्रांति को भी खारिज किया कि गीता केवल संन्यासियों या मंदिरों तक सीमित ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि गीता बच्चों, युवाओं, गृहस्थों और हर क्षेत्र के लोगों के लिए है। आज गीता पर आधारित शोध भी विभिन्न आयु वर्गों और क्षेत्रों के लिए किए जा रहे हैं।
अपने जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही उनके मन में जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न थे। गुरु के सानिध्य और भगवद्गीता के अध्ययन से उन्हें उन सभी प्रश्नों के उत्तर मिले। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि गीता में हर प्रश्न का उत्तर और हर समस्या का समाधान निहित है।




